२२.२.१३

जमेल का तुला...

निघायचे असेल ना? जपून जा,
घरात काय राहिले, बघून जा...

सुने तुझ्याविना असेल देवघर,
(सुगंधरूप त्यात तू भरून जा...)

छतास उंच राहिले करायचे,
इथून तू हळूच अन् लवून जा...

सुके
बाग ही तुझ्या विना, जरा;
फुलांस स्पर्श एकदा करून जा...

जमेल का तुला फिरून पाहणे?
जमेल त्याक्षणी पुन्हा वळून जा...

पुरे मनात आसवांस ढाळणे,
इथेच यायचेय ना?, हसून जा...
----------------------------------------------------------------
हर्षल (२२/२/१३ - सकाळी १०.३५)

१६.२.१३

नि:शब्द प्रेम माझे...

पैशात फार थोड्या भागेल एक दिवशी,
प्रेमात सर्व आहे, समजेल एक दिवशी...

दु:खास अंत नाही, समजून वाग ना तू,
सुख भोगण्याची तर्‍हा, बदलेल एक दिवशी...

सांभाळ तू घराला, अंधार मी पहातो,
समई उजेड देती, गवसेल एक दिवशी...

नि:शब्द प्रेम माझे, सांगू कसे तुला मी?
विसरावयास दैन्य, विनवेल एक दिवशी...

आहे जरी कफल्लक, दिलदारही मी आहे,
जागा तुझ्या मनी मी मिळवेल एक दिवशी...

आभाळ फाटलेले, दे हात तू जरासा,
लढतोय एकट्याने, उसवेल एक दिवशी...
---------------------------------------------------------------
हर्षल (१६/२/१३ - रात्रौ. १०.३५)
---------------------------------------------------------------

२९.१.१३

खाँमोशीमें सुन सको...

खाँमोशीमें सुन सको जिन्हे, गीत जब गाता है कोई,
तब लगता हरदम उसने जीने में चोंटें है खाई...

दिल तक पहूँचे ये उसके आवाज की ताकत है ,
दिलसे निकले लफ्ज, किसीसे चाहत की गेहराई...

अब तक बरसें बादल जो, पिछली बारीश के थे,
अब तक ढूँढ रहा हूँ मैं तो सर पर साया कोई...

भूलना चाहे भी तो, ये याद तेरी मुश्कील जालीम,
वक्त से आगे भागती, तेरी तरफ मेरी तनहाई...

बस अकेला मैं रहा, दुसरा कोई नहीं हमनवाँ,
रास्तेभर धूँप-छाव से लडती रही ये परछाई...
-------------------------------------------------
हर्षल (२९/१/२०१३ - रात्रौ. १२.१५)